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कोटि कोटि अंडन  में धन्य ब्रह्ममंडल है ,
तामे उनवास कोटि भूमि सुखकंद है,
तामे सप्तद्वीप,  सप्तद्वीपन  में जम्बूद्वीप,
तामे नौखंड, भरतखंड में आनंद है,
तामे चारधाम नीके सप्तपुरी मध्य देश,
तामे ब्रजमंडल की छायी  मकरंद है,
चौद्हू भुवन पर्यंत सुख जेते है,
ताते सर्वोपरि श्रीवृन्दावनचंद है
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